चुम्बकीय क्षेत्र के कारण धारावाही चालक पर बल
Force on a Current Carrying Conductor due to Magnetic Field

 

चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर धारावाही चालक पर एक बल कार्य करने लगता है । ” जब किसी धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो इस चालक पर एक बल कार्य करने लगता है जिसकी दिशा चुम्बकीय क्षेत्र तथा धारा दोनों की दिशाओं के लम्बवत् होती है|” इस तथ्य को हम एक साधारण प्रयोग द्वारा देख सकते हैं|

एक शक्तिशाली नाल चुम्बक के ध्रुवों N व S के बीच एक ढीला – ढाला तार इस प्रकार बाँध देते हैं कि तार को लम्बाई ध्रुवों के बीच चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् चुम्बकीय क्षेत्र के ही तल में हो । अब जैसे ही तार वैद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो तार पर एक बल F कार्य करने लगता है और तार ऊपर उठकर बाहर की ओर जन जाता है तार में धारा कि दिशा को विपरीत करने पर अथवा चुम्बक को पलटकर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को उल्टा करने पर तार नीचे की ओर को तन जाता है । स्पष्ट है कि अब तार पर लगने वाला बल नीचे की ओर लगने लगता है ।

चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा निर्धारण सम्बन्धी नियम – चुम्बकीय क्षेत्र रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा निम्नलिखित दो नियमों में से किसी भी नियम द्वारा निर्धारित की जा सकती है-

( 1 ) दाएं हाथ की हथेली का नियम नं 02 – यदि हम अपने दाएँ हाथ का पंजा पूरा फैलाकर इस प्रकार रखें कि अंगूठा वैद्युत धारा । की दिशा में तथा फैली हुई अँगुलियाँ बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र ( B ) की दिशा में हों , तो चालक लगने वाला बल F हथेली के लम्बवत् हथेली से धक्का देने की दिशा में होगा ( चित्र 57 ) ।

( 2 ) फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम – यदि हम अपने बाएँ हाथ का अंगूठा तथा उसके पास वाली पहली अँगुली ( fore finger ) तथा मध्य अँगुली इस प्रकार फैलाएँ कि तीनों एक – दूसरे के लम्बवत् रहें , तो यदि पहली अँगुली चुम्बकीय क्षेत्र B की दिशा को तथा मध्य अँगुली वैधुत धारा । की दिशा को प्रदर्शित करती है तो अँगूठा चालक पर लगने वाले बल F की दिशा को बताएगा , ( चित्र 58 ) |